रंगाथिटटु पक्षी विहार – एक दिन पंखों वाले स्वर्ग में।

हम रंगाथिटटु पक्षी विहार की एक दिन की ड्राइव पर गए। सुंदरता से अभिभूत यह जगह मानो अपने पंखो से उड़ा कर कही दूर ले गयी मुझे ।

मैंने अपना ये अनुभव एक कविता में लिखा। आखिरकार, प्रकृति और कविता से बेहतर क्या है?

तो वो कविता आपके सामने पेश करती हूँ।

 

जैसे ही हमने विहार में प्रवेश किया, ऊपर बादलों से पटे आकाश में चित्रित सारस उड़ने लगे,

और हम स्वर्ग की ओर ताकते हुए,

मटियाली कावेरी के किनारे चलने लगे,

सफेद और सलेटी पक्षियों के झुंड के झुंड छोटे-छोटे दीपों पर स्थित अर्जुन वृक्षों पर बैठे थे,

ठंडी करारी हवा उनके गीतों से झनक रही थी,

हालांकि मैं उन ध्वनियो में से एक को भी नहीं पहचान पायी।

हम इन पंखो वाली पहेलियों को पहचानने के लिए दूर हरियाली में टकटकी लगा देख रहे थे,

लेकिन हमारी आंखों ने पक्षियों के बजाय तीन मगरमच्छ ढूँढ लिए, जो अपने खुले जबड़ों के साथ चट्टानो पर विश्राम फ़रमा रहे थे,

जैसे वो इंतज़ार कर रहे थे की कोई मछली उनके मुंह में गोता लगाएगी।

उनकी स्थिरता ने हमें सोचने पर मजबूर किया की वो असली थे या नकली,

और फिर हमने उनमें से एक को ठंडे पानी में उतरते हुए देखा,

जैसे की हमें अपने पीछे-पीछे आने के लिए लुभा रहा हो।

 

जंगल के करीब जाने के लिए हम एक नाव में बैठे,

और जैसे ही हमारी नाव कावेरी के उथले पानी में रास्ता बना चल पड़ी,

सलेटी रंग के जलकाग और सफेद और बड़े बगुले चारों और उड़ने लगे,

जबकि मवेशि बगुले आराम से बैठे थे,

सीना चौड़ा किए अपने सुनहरे सिर की प्रदर्शनी कर रहे थे।

गुंगले झुंडो में बैठे थे ऐसे पेड़ों पर,

जो पानी में छातों की तरह खड़े थे।

सौभाग्य से हमने हवासील दूर से ही देखें,

क्यूँकि उनके गले एक मानव को समा जाने की क्षमता रखते थे,

और भूरे और सफेद आइबिस हमें ऊपर से देख रहे थे,

एक स्याह बादल के साथ,

जिसकी पूंछ पर एक छुटकु सा भी था,

एक पल वे दोनो धीरें चलते थे, तो दूसरे पल तेज़ी से आगे भागने लगते थे,

जैसे कि पिताजी शिशु को उड़ने के साथ-साथ शौखीबाज़ी भी सिखा रहे थे।

 

हम आगे बढ़ते रहे,

छोटे-छोटे दीपों की श्रृंखला से गुज़रते हुए,

हमारी नौका पक्षियों से लबालब पेड़ों के झुंडो के क़रीब से निकलती रही।

मुझे समझ नहीं आ रहा था की कहा देखूँ,

क्योंकि वे सब पंछी एक जैसे दिखते थे,

कोई अपने घोंसले से हमें देखता था,

जिसके अंदर एक, दो, या तीन बड़े बच्चे थे,

तो कुछ शाखाओ पर बैठे जासूसी कर रहे थे।

लेकिन किसने कहा कि वे सभी सामाजिक नियमो का पालन कर रहे थे,

जबकि कुछ अपनी चोंच में पत्तियों और डालियों के साथ उड़ान भर रहे थे,

तो अन्य अपने मात्रत्व और पितर्तव में महीनो आगे थे,

जब मैं उनके समाज के बारे में सोच रही थी,

तभी हमने एक विशाल मगरमच्छ देखा,

बस एक दीप के किनारे आराम करता हुआ,

और जैसे ही हमारी नाव पानी में आगे बढ़ी,

वह भी पानी में उतर गया।

हमारा नाविक नाव को चला रहा था,

और मगरमच्छ बराबर में तैर रहा था।

 

चारों ओर की हरियाली में झींगुर एवं साइकैडा झू-झू कर रहे थे,

हल्की-हल्की हवा पानी की सतह पर तैर रही थी,

और पानी की पतली-पतली लहरें बना कर उनको नचा रही थी,

लहरें जो दिन की चाँदनी से चमक रही थी,

हवा ने बांस के पेड़ों को झुकाया और बदले में वो तिड़क पड़े,

और उनकी पत्तियां ऐसे शोर मचा रही थी,

जैसे कि एक प्रेमी कहीं अपनी प्रेमिका की काँच की चूड़ियों के साथ खेल रहा हो।

प्रकृति के इस बुलबुले में,

हवा में तैरती हुई चित्रित सारसे,

साथ में जलकाग,

चित्रित सारस के मटियाले बच्चे पत्थर के द्वीपों पर अपनी माओं का इंतजार करते हुए,

चितला कौडियाल अपने जेबरा पंखों को फड़फड़ाते हुए,

दूर कही गाती हुई कोयल,

हवा में झूमते नारियल के ऊँचे पेड़,

बड़े-बड़े समूहों में शांतिपूर्ण हवासील और सफेद सारस,

सभी ने मिलकर मुझे एक अलग ही दुनिया में पहोचा दिया,

जिस दुनिया को मैंने केवल सपनो में देखा था,

और फिर बादल नृत्य करने लगे,

और उनकी बूंदा ने हमें चारों तरफ़ से परदों में घेर लिया।

 

ठंडी रुहीन हवा ने बारिश के पानी को हमारे चेहरे पर छिड़का,

और टेढ़ी बारिश ने हमें भिगो दिया।

बारिश के साथ-साथ, एक चित्रित सारस उड़ता हुआ आया,

और अपने बच्चों के ऊपर आ कर उसने अपने पंख बहोत धीरें-धीरें फड़फड़ाये,

जबकि उसके पैर बस उसके शरीर से लटक रहे थे,

फिर उसने अपने पंखों को अपने चारों तरफ़ लपेट लिया

और फिर अपने पैरों से पत्थरों पर उतरा,

अपने भीगते हुए छोटे बच्चों के क़रीब होने के लिए।

ये सब मानो बहोत ही धीमें धीमें हो रहा था।

उस पल में,

पानी की बूँदो ने मेरे गालों को सराहा,

और मैंने अपनी आंखें बंद कर दीं

और दुनिया के साथ ख़ुद को एक महसूस किया।

 

मैं भी एक बांस के झुंड के नीचे एक बेंच पर बैठी, कावेरी के बगल में,

अपने पंखो वाले दिन के बारे में लिखने के लिए,

बाँस ऐसे शोर मचा रहे थे मानो किसी भी पल वो मुझे मार सकते थे,

और बड़ी लाल चींटियाँ मुझ पर रेंगने लगी,

जैसे कि मुझे अपने निवास से दूर जाने के लिए कह रही हो,

या शायद प्यार से मुझे गले लगा रही थी।

मुझे नहीं पता था की

सूर्यास्त हुआ था की नहीं,

लेकिन पक्षियों को बेहतर पता था,

क्योंकि वो रात को सोने से पहले वाला तांडव कर रहे थे।

एकमात्र तांडव जो मुझे सुनने के लायक लगा।

पास में कॉलेज के दोस्तों के एक समूह ने आदिवासियों जैसा शोर मचाया,

और मैं अफ्रीका या शायद ऐमज़ॉन के जंगलो में चलने लगी,

जबकि जीवन से भरपूर कावेरी मेरे आगे दौड़ रही थी।

पक्षी उन्ही पुरानी शाखाओं पर बैठ गए,

जो उन्हें घर जैसी महसूस होती होगी।

मैंने सोचा की क्या वो हर रात एक ही पेड़ पर गुज़ारते थे या फिर एक अलग पेड़ पर,

या वो शाखाएँ बदलते थे या नहीं।

मुझे समय के साथ पता लगाने की उम्मीद थी।

 

क्यूँकि फिर मुझे अपने घर लौटना था,

मैं उन पक्षियों को देखने और सुनने के लिए फिर से जाऊँगी,

तब तक चित्रित सारस के बच्चे अच्छे से गुलाबी हो जायेंगे,

और शायद मैं एक या दो ध्वनिया पहचानने में सक्षम हो जाऊँगी।

 

तब तक, उन पक्षियों को हवा में उड़ने देते हैं,

और अपनी उड़ान से आकाश को रंगने देते है।

 

 

ranganathittu bird sanctuary

 

Ranganathittu Bird Sanctuary

 

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तस्वीरें इस सुंदर जगह के साथ न्याय नहीं करती क्योंकि मेरे पास बड़ा लेंस नहीं था। मैंने ये सभी तस्वीरें फ़ोन से उतारी थी। मैं आपको अपनी दुनिया की एक बेहतर झलक देने के लिए एक बेहतर कैमरा इस्तेमाल करने का वादा करती हूं।

 

आने-जाने की योजना ऐसे करें.

हम गाड़ी से पक्षी विहार गए थे। यात्रा लगभग चार घंटे लंबी थी। विहार में कई रेस्तरां थे, इसलिए खाने की कोई समस्या नहीं होगी। यदि आपके पास एक अच्छा कैमरा और दूरबीन है, तो उन्हें ज़रूर ले जाए। यात्रा करने का सबसे बेहतरीन समय दिसंबर से जून तक है। प्रवासी पक्षी दिसंबर में आते हैं और फरवरी से घोंसले बनाने शुरू करते हैं। अभयारण्य कावेरी और इसके द्वीपों के आसपास स्थापित है। हमारे पास कयी नावों की सवारी करने का विकल्प था, और हमने उनमे से एक विशेष सवारी का चयन किया जो चालीस मिनट लम्बी थी, लगभग सात लोगों को ले जाती थी, और सामान्य सवारी से और दूर तक ले जाती थी। हमने एक और परिवार को हमारे साथ चलने के लिए कहा ताकि हम विशेष सवारी (1500 रुपये) की कीमत को आधा-आधा बाँट सकें। इसके अलावा, आप अभयारण्य के बगीचों में घूम सकते हैं और उन पर लगे खूबसूरत फलो और फूलों के अलावा उन पर बैठे छोटे पक्षियों को भी देख सकते है।

मज़े कीजिए।

 

Ranganathittu Bird Sanctuary

 

क्या आप पक्षियों को देखना पसंद करते हैं? मुझे टिप्पणियों में अपने पसंदीदा पक्षी के बारे में बताएं।

 

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