हिमाचल प्रदेश के अदभुत मंडी शहर में हम: और वहाँ व्यतीत किया हमारा कुछ समय
हम व्यास नदी पर है।
ये हिंदी का प्यार आज छूटता ही नहीं है। जबसे वो हिमाचल प्रदेश कि हिंदी दसवीं कक्षा की किताब पढ़ी है मन करता है सब हिंदी में ही लिखने को। और क्यूँ ना करें? हिंदी मेरी मात्र-पित्र की भाषा है।
और हम है भी ऐसी जगह। हम है मंडी में, इस छोटे से हिमाचलि शहर को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है। बहुत मंदिर है यहाँ। पुराने, नए, सब तरह के मंदिर। मेरे पति—जिन्होंने कहा था हम यहां आएँगे—बताते है कि इस हिमाचलि काशी में लोग कुछ १२-१३ सदी में बस गए थे। बहुत पहले से इंसान रहते है यहाँ।
जबकि मेरे होटेल में सफ़ायी वाली बताती है की उसके सामने ही इस नदी के तट पर कोई ख़ास घर नहीं थे। जंगल था यहाँ। अब मैं अपनी बालकनी में खड़े हो कर देखती हूँ तो मुझे घर ही घर दिखते है सामने। ऊँचे, बड़े, लम्बे, छोटे घर। सबकी छत कुछ टेढ़ी है, जैसे होती है हिमाचल के घरों की। ऊपर एक रिसॉर्ट भी दिखता है, पर उससे ज़्यादा कुछ नहीं|
बराबर बराबर एक दूसरे से कंधे से कंधा मिलाए खड़े है ये घर। बीच में एक इंच जगह भी नहीं दिखती नदी के इस तट पर। जगह होगी ज़रूर। घरों के आगे पत्थरों से पटा है नदी का किनारा। तट कह सकते है उसको। बड़े छोटे सब प्रकार के पत्थर दिखते है वहाँ। जे़ सी बी मशीन भी काम कर रही है तट के बिलकुल पीछे जिससे पता चलता है कि पहाड़ का और हिस्सा कट कर नदी पर और मकान या दुकान बनने वाले हैं।
